मैं हरि पतित पावन सुने

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं हरि पतित पावन सुने

मैं पतित, तुम पतित-पावन, दोउ बानक बने

ब्याध गनिका गज अजामिल, साखि निगमनि भने

और अधम अनेक तारे, जात कापै गने

जानि नाम अजानि लीन्हें, नरक जमपुर मने

दास तुलसी सरन आयो, राखिये अपने

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।