क्यों दुःख करू इस बात का

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॥ पावन पाठ ॥

क्यों दुःख करू इस बात का की वक़्त ये दुःख दाई है,

मुझको ख़ुशी इस बात की के साथ मेरे साई है,

लाख आंधी तूफ़ान आये जंदगी की राह में,

बेबसी नाकामियां हो चाहे मेरी चाह में,

डर नहीं मुझे हर कदम गुरु देव मेरा सहाई है,

क्यों दुःख करू इस बात का की वक़्त ये दुःख दाई है,

आपदा की बाढ़ आये संकटो का दौर हो,

उलजनो की धुप चाहे मेरे चारो और हो,

बेफिक्र हो गुरु वर किरपा की मुझपे जो परछाई है,

क्यों दुःख करू इस बात का की वक़्त ये दुःख दाई है,

चाहे जमाना छीन ले दामन से मेरे ये ख़ुशी ,

हर हाल में खुशहाल ही होगी मेरी ये जिंदगी,

मुझको भरोसा संग साई नाथ की प्रभु ताई है,

क्यों दुःख करू इस बात का की वक़्त ये दुःख दाई है,

हमने पाई है शरण श्री साई जी के धाम की,

माला जपते हम सब श्री साई जी के नाम की

श्रद्धा सबुरी हिरदये में हमने सदा ही वसाई है

क्यों दुःख करू इस बात का की वक़्त ये दुःख दाई है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।