म्हाने जाम्भोजी दीयो उपदेश

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

म्हाने जाम्भोजी दीयो उपदेश भाग म्हारो जागियो

मरूधर देश समराथल भूमि गुरूजी दियो उपदेश

पीपासर में प्रकट भया आय सुधारयो बागड देश

म्हाने जाम्भोजी दीयो उपदेश.

बीदे ने विराट दिखायो पुल्हे जी ने पाताल

उन्नतीस नियम सुणाय गुरूजी पायो म्हाने अमृत पाहल,

म्हाने जाम्भोजी दीयो उपदेश, भाग म्हारो जागियो

सांगा राणा और नरेषां परच्यो महमद खान

लोदी सिकन्दर ऐसो परच्यो पढणी छोड दी कुरान

म्हाने जाम्भोजी दीयो उपदेश भाग म्हारो जागियो

चिम्पी चोलो उणरे तन रो पडियो जांगलु मांय

चिम्पी चोले रा दरसण करस्यां न्हावाला बरसिंगाली जा

म्हाने जाम्भोजी दीयो उपदेश भाग म्हारो जागियो

मोखराम बंगांली वाल हरिचरणा लवलीन

दास जाण म्हापे किरपा कीज्यो भक्ति में होऊ प्रवीण

म्हाने जाम्भोजी दीयो उपदेश, भाग म्हारो जागियो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।