एहसान ले किसीका हम को नहीं गवारा

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॥ पावन पाठ ॥

एहसान ले किसीका हम को नहीं गवारा,

जीन को जब है काफी तेरे नाम का सहारा,

एहसान ले किसीका हम को नहीं गवारा,

काबिल नहीं हु जिसके वो नाम ले लिया है,

पूछे बिना ही तुझसे तेरा नाम ले लिया है,

इस के सिवा न या कुछ और तो तुम्हरा,

माना के धीरे धीरे मेरी नाव चल रही है,

लेकिन सही दिशा में मंजिल पे बढ़ रही है,

बले देर से मिले पर मिल जाएगा किनारा,

तेरा नाम लेके जागे तेरा नाम लेके सोते,

तेरे नाम के सहारे जीवन हमारा बीते,

अपना तो चल रहा है आराम से गुजारा,

तेरे नाम का करिश्मा मैंने तो जब से जाना,

सब छोड़ कर हुआ हु तेरे नाम का दीवाना,

सोनू जहां में सब से तेरा नाम लगता प्यारा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।