म्हापे जद भी मुसीबत

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

म्हापे जद भी मुसीबत कोई आवन लागे,

माहरे सिर के ऊपर चुनड़ी लेहरावण लागे,

जद नैया हिचकोले खावे माँ थारी चुनड़ी लहरावे,

अपने आप ही भवर में नैया चालन लागे,

माहरे सिर के ऊपर चुनड़ी लेहरावण लागे,

लाज भगत की जावन लागे,

चुनड़ी मैया की लेहरावण लागे,

थारी चुनड़ी माँ लाज ने बचावण लागे,

माहरे सिर के ऊपर चुनड़ी लेहरावण लागे,

जद जद माहरो मन गबराये माँ थारी चुनड़ी लहरावे,

हाथो हाथ ही यु बेटो मुश्कावन लागे,

माहरे सिर के ऊपर चुनड़ी लेहरावण लागे,

जद जद माइयाँ माँ सु रूठे वनवारी कुछ और न सूजे,

थारा बेटा थाने चुनड़ी उड़ावन लागे,

माहरे सिर के ऊपर चुनड़ी लेहरावण लागे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।