॥ पावन पाठ ॥
जगन्मात जगदम्बे तेरे जयकारे,
तू शक्ति भगवती भवानी
महिमामयी महामाया बखानी
विश्व रचे पाले संहारे
शांति करी मंगल सुख रूपा
तू वरदा है दिव्य अनूपा
शरणागत के काज संवारे
निज जन त्राण-परायण देवी
असुर हरि दुर्गा सुर सेवी
श्री लक्ष्मी जन तुझे पुकारे