बिगड़े हुए नसीब को हमने बना लिया

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॥ पावन पाठ ॥

बिगड़े हुए नसीब को हमने बना लिया

तेरे चरण की धूल को सिर पे सजा लिया,

बिगड़े हुए नसीब को हमने बना लिया

हो रोग तो इलाज भी हो जाएगा कही,

बिगड़े नसीब की मिलती दवा नहीं,

तेरे चरण की धूल में अमृत को पा लिया,

बिगड़े हुए नसीब को हमने बना लिया

माया के झूठे जाल में कुछ इस तरह फसे,

तुम साथ थी मगर तुम्हे पहचान न सके,

जैसे किसी ने आँख पर पर्दा गिरा दियां,

बिगड़े हुए नसीब को हमने बना लिया

कैसे अदा करे तेरा दादी जी शुकरियाँ,

पत्थर से इस नसीब को हीरा बना दियां,

अच्छा हुआ के आप की चौकठ पे आ गया,

बिगड़े हुए नसीब को हमने बना लिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।