नैनहीन को राह दिखा प्रभु

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नैनहीन को राह दिखा प्रभु

पग पग ठोकर खाऊँ मैं

नैनहीन को..........

तुमरी नगरिया की कठिन डगरिया,

चलत चलत गिर जाऊं मैं प्रभु,

नैनहीन को राह दिखा प्रभु,

पग पग ठोकर खाऊँ मैं,

नैनहीन को राह दिखा प्रभु,

चहुँ ओर मेरे घोर अँधेरा

भूल न जाऊं द्वार तेरा

चहुँ ओर मेरे घोर अँधेरा

भूल न जाऊं द्वार तेरा

एक बार प्रभु हाथ पकड़ लो

मन का दीप जलाऊँ मैं प्रभु

नैनहीन को राह दिखा प्रभु

पग पग ठोकर खाऊँ मैं

नैनहीन को.............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।