दुख हरो द्वारिकानाथ शरण मैं तेरी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तुम कहाँ छुपे भगवान करो मत देरी,

दुःख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ,

दुख हरो द्वारिकानाथ शरण मैं तेरी ,

यही सुना है दीनबन्धु तुम सबका दुख हर लेते,

जो निराश हैं उनकी झोली आशा से भर देते ,

अगर सुदामा होता मैं तो दौड़ द्वारका आता ,

पाँव आँसुओं से धो कर मैं मन की आग बुझाता,

तुम बनो नहीं अनजान, सुनो भगवान, करो मत देरी,

दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ,

जो भी शरण तुम्हारी आता, उसको धीर बंधाते,

नहीं डूबने देते दाता, नैया पार लगाते ,

तुम न सुनोगे तो किसको मैं अपनी व्यथा सुनाऊँ,

द्वार तुम्हारा छोड़ के भगवन और कहाँ मैं जाऊँ,

प्रभु कब से रहा पुकार, मैं तेरे द्वार, करो मत देरी,

दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।