बोले बोले रे राम चिरैया रे

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

बोले बोले रे राम चिरैया रे

बोले रे राम चिरैया।

मेरी साँसों के पिंजरे में

घड़ी घड़ी बोले।

घड़ी घड़ी बोले।

बोले बोले रे ...

ना कोई खिड़की ना कोई डोरी।

ना कोई चोर करे जो चोरी

ऐसा मेरा है राम रमैया रे।

बोले बोले रे ...

उसी की नैया वही खिवैया।

लहर रही उसकी लहरैया।

चाहे लाख चले पुरवैया रे।

बोले बोले रे ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।