मेरी जिसके भरोसे चलती जीवन नैया

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॥ पावन पाठ ॥

मेरी जिसके भरोसे चलती जीवन नैया

कोई और नहीं वो झुँझन वाली मैया,

जिसने थामी पग पग मेरी बहियाँ,

वो दादी मियां

मेरी जिसके भरोसे चलती जीवन नैया

तकलीफ के तूफानों में डोली थी जीवन नाइयाँ,

जिसने आकर के थामा वो थी रानी सती मैया,

मुझे पार लगाए बन कर के खेवइयाँ,

मेरी जिसके भरोसे चलती जीवन नैया

चाहे जो भी हो जाए विश्वाश न टूट पाये,

संकट में इनको पुकारो ये सिंह सवारी आये,

बन जाती रक्शक कर चुनड़ी की छैया दादी मैया,

मेरी जिसके भरोसे चलती जीवन नैया

चरणों से मुझे लगाया माँ अपना मुझे बनाया,

दिन रात तेरे गुण गाऊ इस लायक मुझे बनाया,

सुनील का जीवन उज्वल कर दो मियां ,

मेरी जिसके भरोसे चलती जीवन नैया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।