भोला डमरू वाला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

केलाश पे बेठा लगा समाधि बाबा डमरू वाला,

छवि निराली मुख पे चन्दा भोला डमरू वाला,

वो बस्म रमा के अंग अंग पे बेस बनाया गोरी,

तीजी आँख से जग ने विपदा न किस हो रही,

तेरे केश में गंगा पाप हारे सब काहै जग रखवाला,

छवि निराली मुख पे चन्दा भोला डमरू वाला,

तीन लोक के नाथ तुम्ही हो कहती दुनिया सारी,

बाबा मेरे भोले भाले काटे विपदा बाहरी,

फिर आया द्वारे जो भी तेरे झोला है भर डाला,

छवि निराली मुख पे चन्दा भोला डमरू वाला,

तेरे सहारे बाबा मेरी चल रही न इस घर में,

घरती पे तू जल में तू तू ही है अम्बर में,

हर कण कण में तेरी माया उतम ने लिख डाला,

छवि निराली मुख पे चन्दा भोला डमरू वाला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।