मत बेटी मारो

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॥ पावन पाठ ॥

धरती रोई अम्बर रोया रोये चाँद सितारे,

मों तमाशा देख बेटी का विनती करते सारे.

मत बेटी मारो मत बेटी मारो अपनी सोच सुधारो,

जिस भारत माँ की लाज बचा कर वीरो ने दिखलाई,

उसे भारत माँ की लाज है देखो खतरे में है आई,

तडपउठा है देश आज ये बेटी को तुम तारो,

मत बेटी मारो मत बेटी मारो अपनी सोच सुधारो,

इक तरफ तो बेटी देखो घर घर पूजी जाती ,

दूजी तरफ ये बेटी देखो पल पल नोची जाती है,

दूध पिया है तुम ने जिसका उस माँ को पहचानो ,

मत बेटी मारो मत बेटी मारो अपनी सोच सुधारो,

अगोष का लावा कूद पड़ा और न डरे गी,

जुल्म सितम हम जालिम का और न सहेगी ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।