भारत ये रहना चाहिए

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॥ पावन पाठ ॥

देश से है प्यार तो

हरपल यह कहना चाहिए

मैं रहूं या ना रहूं

भारत ये रहना चाहिए

देश से है प्यार तो

हरपल यह कहना चाहिए

मैं रहूं या ना रहूं

भारत ये रहना चाहिए

सिलसिला ये बाद मेरे

यूँ ही चलना चाहिए

मैं रहूं या ना रहूं

भारत ये रहना चाहिए

आ..

मेरी नश नश तार कर दो

और बना दो एक सितार

राग भारत मुझपे छेड़ो

झन-झनाओ बार बार

देश से ये प्रेम

आँखों से छलकना चाहिए

मैं रहूं या ना रहूं

भारत ये रहना चाहिए

देश से यह प्रेम

आँखों से छलकना चाहिए

मैं रहूं या ना रहूं

भारत यह रहना चाहिए

शत्रु से कह दो ज़रा

सीमा में रहना सीख ले

ये मेरा भारत अमर है

सत्य कहना सीख ले

भक्ति की इस शक्ति को

बढ़कर दिखना चाहिए

मैं रहूं या ना रहूं

भारत ये रहना चाहिए

है मुझे सौगंध भारत

सौगंध भारत है मुझे

भूलूँ ना एक छन तुझे

हम्म..

रक्त की हर बूँद तेरी

है तेरा अर्पण तुझे

आ..

युद्ध ये सम्मान का है

मान रहना चाहिए

मैं रहूं या ना रहूं

भारत ये रहना चाहिए

मैं रहूं या ना रहूं

भारत ये रहना चाहिए

मैं रहूं या ना रहूं

भारत ये रहना चाहिए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।