ॐ जय कलाधारी हरे

पारंपरिक
महादेव भजन बाबा बालक नाथ भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ॐ जय कलाधारी हरे, स्वामी जय पौणाहारी हरे,

भक्त जनों की नैया, दस जनों की नैया भव से पार करे,

ॐ जय कलाधारी हरे...

बालक उमर सुहानी, नाम बालक नाथा,

अमर हुए शंकर से, सुन के अमर गाथा ।

ॐ जय कलाधारी हरे...

शीश पे बाल सुनैहरी, गले रुद्राक्षी माला,

हाथ में झोली चिमटा, आसन मृगशाला ।

ॐ जय कलाधारी हरे...

सुंदर सेली सिंगी, वैरागन सोहे,

गऊ पालक रखवालक, भगतन मन मोहे ।

ॐ जय कलाधारी हरे...

अंग भभूत रमाई, मूर्ति प्रभु रंगी,

भय भज्जन दुःख नाशक, भरथरी के संगी ।

ॐ जय कलाधारी हरे...

रोट चढ़त रविवार को, फल, फूल मिश्री मेवा,

धुप दीप कुदनुं से आनंद सिद्ध देवा ।

ॐ जय कलाधारी हरे...

भक्तन हित अवतार लियो, प्रभु देख के कल्लू काला,

दुष्ट दमन शत्रुहन , सबके प्रतिपाला ।

ॐ जय कलाधारी हरे...

श्री बालक नाथ जी की आरती, जो कोई नित गावे,

कहते है सेवक तेरे, मन वाच्छित फल पावे ।

ॐ जय कलाधारी हरे...

ॐ जय कलाधारी हरे, स्वामी जय पौणाहारी हरे,

भक्त जनों की नैया , दस जनों की नैया भव से पार करे,

ॐ जय कलाधारी हरे ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।