ये मेरा मन एक सागर है

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॥ पावन पाठ ॥

ये मेरा मन एक सागर है सागर का तू किनारा है तू किनारा है ,

मेरे मन के सूने अम्बर में, तू चमकता हुआ तारा है एक तारा है

मैंने रात दिन परमेश्वर,तेरी महिमा को दिल में बसाया,

तेरा चाँदना , मेरी आत्मा पे ,रात दिन है छाया

तू नहीं तो, मेरी आँखों में,अंधियारा ही अंधियारा है

ये मेरा मन एक सागर है ...................................................

मेरे चाँद तू , मेरा चाँदना मेरे जीवन का तू उजियारा है ,

मेरे दुःख भरे, संसार में , मेरे पतझड़ की तू ही बहार है

मेरी आँखों में धुन्ध कोहरा है आँखों का तू उजियारा है

ये मेरा मन एक सागर है ............

मेरे फुलसंदे वाले बाबा ,तू है आत्माओं का स्वामी

मुक्तिदाता ,हे विधाता ,मेरे मेरे सतगुरु अन्तर्यामी

मैं तो धरती का धूल गर्दा हूँ ,तू गगन का उजियारा

ये मेरा मन एक सागर है ...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।