अर्जी मेरी कब पड़ोगे सँवारे तुम बता दो न

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अर्जी मेरी कब पड़ोगे सँवारे तुम बता दो न,

प्यार तुम को भी है मुझसे तुम किसी दिन जता दो न,

अर्जी मेरी कब पड़ोगे सँवारे तुम बता दो न,

मेरी आँखों से बेहता है गंगा यमुना से भी जयदा पानी,

तुम भी न सुनोगे तो कौन सुने मेरी पीढ़ भी नहीं है किसे ने जानी,

पतवार तुम्हारे हाथ मेरी अब पार मुझे भी लगा दो ना,

अर्जी मेरी कब पड़ोगे सँवारे तुम बता दो न,

हारे के सहारे हो तुम तो मेरी हार से क्यों अनजान रहे बोलो,

क्यों गम सारी ही दुनिया के मेरे दिल में ही मेहमान रहे बोलो,

करदो रेहम मुझपे भी प्रभु हसना मुझे भी सीखा दो न,

अर्जी मेरी कब पड़ोगे सँवारे तुम बता दो न,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।