सर्वेश्वरी जय जय जगदीश्वरी माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सर्वेश्वरी, जय जय जगदीश्वरी माँ, तेरा ही एक सहारा है

तेरी आंचल की छाहँ छोड़ अब नहीं कहीं निस्तारा है

सर्वेश्वरी जय जय ....

मैं अधमाधम, तू अघ हारिणी ! मैं पतित अशुभ, तू शुभ कारिणी

हें ज्योतिपुंज, तूने मेरे मन का मेटा अंधियारा है !!

सर्वेश्वरी, जय जय .....

तेरी ममता पाकर किसने ना अपना भाग्य सराहा है

कोई भी खाली नहीं गया जो तेरे दर पर आया है !!

सर्वेश्वरी, जय जय .....

अति दुर्लभ मानव तन पाकर आये हैं हम इस धरती पर,

तेरी चौखट ना छोड़ेंगे ,अपना ये अंतिम द्वारा है !!

सर्वेश्वरी, जय जय .....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।