मेरी माँ के लंगर वीर उठा कुर वीर लंगर वीर

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मेरी माँ के लंगर वीर उठा कुर वीर लंगर वीर,

मेरी माँ से मुझे मिला दे,कुछ बाते माँ से करा दे,

मेरी माँ का दर्श करा दे यहाँ मुझे माँ की दिखा दे तस्वीर,

मेरी माँ के लंगर वीर उठा कुर वीर लंगर वीर,

माँ अंजनी के लाल तुम हो माँ वैष्णो के तुम हो वजीर,

तन पे सोहे लाल लंगोटा बंधा है सिर पे तेरे चीर,

माँ के दर पे तू पहरा लगाए तेरे हाथो में गधा लहराए,

तू मेरी बिगड़ी बना दे तकदीर,

मेरी माँ के लंगर वीर उठा कुर वीर लंगर वीर,

माँ की गोद में लाल खिलाते बहन से तुम हो मिलाते भी,

अन्धो को तुम नेत्र है देते कुंदन कर देते हो शरीर,

मेरे घर में पधारो वीरा आके ज्योत जगाओ वीरा

साथ में मैया को लाओ महावीर,

मेरी माँ के लंगर वीर उठा कुर वीर लंगर वीर,

श्री राम नाम के प्यारे हो तुम शिव के रुदर अवतार हो तू,

हर मुश्किल को दूर भगाने चीर के पर्वत आते हो तुम,

जब थाम से निकले भवानी तब करते हो तुम अगवानी,

लेके हाथो में ध्वजा लहराते ओ वीर

मेरी माँ के लंगर वीर उठा कुर वीर लंगर वीर,

उस जन पे कोई संकट न आया तेरा चालीसा जो गावे,

सिमरन कर तुम्हे ध्यानु ने धाया अजीत भी तेरा यश गावे,

कहे दास पवन हथ जोड़ कर अपनी आंखो मे तीर है.

भर कर शेरावाली का दर्श करा दे लंगर वीर,

मेरी माँ के लंगर वीर उठा कुर वीर लंगर वीर,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।