मेरा जोगी सुनेहरी जटा वाला हो चिमटेया वाला.

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॥ पावन पाठ ॥

मेरा जोगी सुनेहरी जटा वाला हो चिमटेया वाला.

के मोर सवारी आ गया,

शाहतलियाँ विच बाबा जी दा डेरा,

घर विच हूँ चित लगदा न मेरा,

असा छड़ घर बार जाना के दर्शन पाना के मोरसवारी आ गया,.

मेरा जोगी सुनेहरी जटा वाला हो चिमटेया वाला.

सोहनी गुफा दा सोहना जेहा बाली,

दर तो न कोई जावे खाली,

आसा मंगियां मुरादा पाइयाँ के रीजा सब लाइयाँ के.

मोर सवारी आ गया,

मेरा जोगी सुनेहरी जटा वाला हो चिमटेया वाला.

बारहा साल दी उम्र नयाणी,

महिमा तेरी किसे न जानी ,

आज तर गई दुनिया सारी हूँ आई मेरी वारि,

मोर सवारी आ गया,

मेरा जोगी सुनेहरी जटा वाला हो चिमटेया वाला.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।