जब नयना नीर भरे

-स्वामी सदानन्द जोधपुर
श्री कृष्ण भजन विष्णु भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जब नयना नीर भरे जब अँखियाँ नीर भरे

लूट-लूट दधि माँखन खायो,

ग्वाल बाल संग रास रचायो ,

जब बंशी की टेर करे जब नयना नीर भरे

मात यशोदा ओर वृजवासी,

वृन्दावन की गोपीयां उदासी,

जब छोङ के कृष्ण चले जब नयना नीर भरे

दुःशासन की मति गई मारी ,

चीर खैचण की कीवी तैयारी,

जब द्रोपदी टेर करे जब नयना नीर भरे

हरि भक्तो के सदा सहाई,

नरसी जी की नानी बाई ,

जब आकर भाँत भरे जब नयना नीर भरे

सदानन्द कहे सुणलो सब ही ,

हरी को याद करे कोई कब ही ,

हरि आवत आप घरे जब नयना नीर भरे

रचनाकार:-स्वामी सदानन्द जोधपुर

M.9460282429

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।