चिठ्ठी माई दे भवन तो आयी मैं दीवाना हो गया

कुमार विशु
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चिठ्ठी माई दे भवन तो आयी, लोको मैं दीवाना हो गया

दिल नचेया ते आँख भर आयी, लोको मैं दीवाना हो गया

चिठ्ठी विच्च घलेया है प्यार मैनू माई ने

भेजीयाँ असीसां सो सो वार मैनू माई ने

नी मैं चुम्म के कलेजे नाल लायी

लोको मैं दीवाना हो गया

ख़ुशी विच्च दिल मेरा मारे किलकारियां

खम्ब हुँदै उड जांदा मार के उडारीयाँ

औखी लग्गे हुण पल दी जुदाई

लोको मैं दीवाना हो गया

बार बार पढ़या मैं लिखी होई लिखाई नु

गीली अंखि तकेया मैं अखरां च माई नु

ऐनी ममता मेरे ते वरसाई

लोको मैं दीवाना हो गया

याद है के साला पेहला माई ने बुलाया सी

दित्ता सी प्यार मेनू गल नाल लाया सी

अज्ज फेर ओहिओ शुभ घडी आई

लोको मैं दीवाना हो गया

अर्जी ता ‘दास’ ने लगायी लख वार माँ

होई ए दयाल अज्ज सुनी है पुकार माँ

बाद मुद्दतान दे मेरी वारी आई

लोको मैं दीवाना हो गया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।