सब कुछ मिला है न कोई गिला है

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

सब कुछ मिला है न कोई गिला है,

मेहरबानियों का तेरी ये सिलसिला है,

सब कुछ मिला है न कोई गिला है,

इतने ही भूखे थे के करते इबादत,

उनको नहीं है कोई तुमसे शिकायत,

उनसे ही सीखी हमने बाबा ये आदत,

कर्मो का अपने ये सब सिला है,

मेहरबानियों का तेरी ये सिलसिला है,

सब कुछ मिला है न कोई गिला है,

जब से तुम्हारी रेहमत हुई है,

सुमिरन की तेरे आदत पड़ी है,

मेरा ठिकाना तेरी चौकठ हुई है,

तेरी दया से ये जीवन खिला है

मेहरबानियों का तेरी ये सिलसिला है,

सब कुछ मिला है न कोई गिला है,

जब से बना रोमी तेरी दीवाना दर पे हुआ तेरे बाबा आना जाना,

रेहमतो का तेरी बाबा करू शुकराना,

अटल ये भरोसा कभी न टला है

मेहरबानियों का तेरी ये सिलसिला है,

सब कुछ मिला है न कोई गिला है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।