उस दिन से दीवानी मैं तो हो गई रे

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जिस दिन से निहारी मैंने सांवरियां उस दिन से दीवानी मैं तो हो गई रे,

कुंजन से सुनी जब बांसुरियां,

उसी दिन से दीवानी मैं तो हो गई रे,

हस्ता है जमाना तो हस्ता रहे,

कोई कहता है जो भी वो कहता रहे नाचू गलियों में होके वन्वारियां,

उस दिन से दीवानी मैं तो हो गई रे,

श्याम मेरे हुए मैं हुई श्याम की अब ये दुनिया नही मेरे किस काम की,

रंगी श्याम के रंग में चुनरियाँ खुद से भी बेगानी मैं तो हो गई रे,

उस दिन से दीवानी मैं तो हो गई रे,

माना राधा के जैसी मेरी हस्ती नही मीरा बाई के जैसी मेरी भक्ति नही,

लेले फिर भी खबरियां श्यामा के पिया सोच के ये दीवानी तेरी हो गई रे,

उस दिन से दीवानी मैं तो हो गई रे,

मैं तो देखू याहा और देखू जिधर,

श्याम ही श्याम बस मुझको आये नजर,

अपनालो अब तो नटवर नागारियां,

इक पगली दीवानी तेरी हो गई रे

उस दिन से दीवानी मैं तो हो गई रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।