तेरी याद में जब ऑंसू

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तेरी याद में जब आँसू, आँखों में आते हैं ll

एक दर्द उठे मीठा, और हम मुस्काते हैं l

तेरी याद में जब आँसू l

जब दुनियाँ सोती है, हम रात को जगते हैं ll

जब दुनियाँ जगती है ll, तब 'हम खो जाते हैं ll'

तेरी याद में जब आँसू ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तेरे मिलने की आस नहीं, पर प्यास जगी दिल में ll

तड़फेंगे या कि मिलें ll, 'राजी हुए जाते हैं ll'

तेरी याद में जब आँसू ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सब टूट चुके बन्धन, मन कर रहा वन्दन ll

दिन रात तेरे नग्मे ll, हम 'गाए जाते हैं ll'

तेरी याद में जब आँसू ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।