मुखड़ा देख ले प्राणी जरा दर्पण में

कवि प्रदीप
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॥ पावन पाठ ॥

मुखड़ा देख ले, देख ले

मुखड़ा देख ले प्रानी ज़रा दरपन में हो

देख ले कितना पुण्य है कितना पाप तेरे जीवन में

देख ले दरपन में...

कभी तो पल भर सोच ले प्रानी, क्या है तेरी करम कहानी

पता लगा ले

पता लगा ले पड़े हैं कितने दाग़ तेरे दामन में

देख ले दरपन में

मुखड़ा देख ले प्रानी ज़रा दरपन में

ख़ुद को धोखा दे मत बन्दे, अच्छे न होते कपट के धन्धे

सदा न चलता

सदा न चलता किसी का नाटक दुनिया के आँगन में

देख ले दरपन में

मुखड़ा देख ले प्रानी ज़रा दरपन में हो

देख ले कितना पुण्य है कितना पाप तेरे जीवन में

देख ले दरपन में

मुखड़ा देख ले प्रानी

फिल्म - दो बहनें (1959)

स्वर - कवि प्रदीप

गीतकार - कवि प्रदीप

संगीत - वसंत देसाई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।