मीणा भाई रम जा रात अंधारी

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॥ पावन पाठ ॥

मीणा भाई रम जा रात अंधारी,

काला कामला की गांति मार ले ,कमरिया में भंवर कटारी,

आरड़े पारड़े करसा सुता ,बीच मे गेहूं की ढेरी,

गाड़ी भर गेहूं की लायो ,और चना की बोरी

जाय बाण्या ने हैलो मारियो, सेठां सुणो हमारी,

चादर काड़ पछेवड़ी काड़ो ,और नारियल की बोरी,

जाय घरां ने हेलो मारयो, उठो घर की नारी,

माल ताल को लायो मोखला ,भोजन करो तैयारी,

उठो सन्ता आसण छोड़ो ,भोजन हो ग्यो तैयारी,

जिम चूंट कर घरां पधारो, झगड़ो होवेला भारी,

उत्तर दिशा सूं उठी बादली, बरसे मुसलाधारी,

राम लाल घाटा को मीणो ,लाज राखी गिरधारी,

भजन गायक - लादुराम प्रजापति मालासेरी डूँगरी

97849-82081

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।