रंग जोगी वाला चढ़ गया

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॥ पावन पाठ ॥

रंग जोगी वाला चढ़ गया सोहना के कोई रंग सजदा ही नहीं,

तेरे वाजो जोगी सोह्णेया आ चंगा होर लगदा ही नहीं,

रंग जोगी वाला चढ़ गया सोहना के कोई रंग सजदा ही नहीं,

ऐसी किरपा करदी जोगियां तनु कदे भी बुला न,

तेरे हो गया तेरा रहना होर किसे ते डुला न,

जान मैं तेरे नाम कर ती के दर मैनु जग दा ही नहीं,

रंग जोगी वाला चढ़ गया सोहना के कोई रंग सजदा ही नहीं,

तेरे किरपा सदका जोगियां चलदा है परिवार मेरा,

इस वे मतलबी दुनिया दे विच तू ही है गम खार मेरा,

चरना च रखी जोगियां मैं होर कुझ मंग दा ही नहीं ,

रंग जोगी वाला चढ़ गया सोहना के कोई रंग सजदा ही नहीं,

दर तेरे तो सोहने जोगियां आज तक खाली मुड़िया न,

सनी शान नु एहना दिता ओह कदे भी रुलिया न,

औकात नालो वध दे दिता एह गल विच बंदा ही नहीं

रंग जोगी वाला चढ़ गया सोहना के कोई रंग सजदा ही नहीं,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।