करलो जी करलो दीदार चिंतपूर्णी दा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

फुला नाल सजेया दरबार चिंतपूर्णी दा,

मेला बड़ा भरे हर साल चिंतपूर्णी दा,

जय माता दी सब नु भुला के भगतो,

करलो जी करलो दीदार चिंतपूर्णी दा,

माये तेरे दर उते खाली कोई न मुडेया,

मैं भी कई जन्मा तो चरना च जुड्या,

चरना नाल लग मिले प्यार चिंतपूर्णी दा,

जय माता दी सब नु भुला के भगतो,

करलो जी करलो दीदार चिंतपूर्णी दा,

तेरे जेया होर न कोई माये साहनु भन्दा है,

वखरा नजारा तेरे दर उते आउंदा है,

जपदे रहना बस नाम चिंतपूर्णी दा,

जय माता दी सब नु भुला के भगतो,

करलो जी करलो दीदार चिंतपूर्णी दा,

हर साल तेरे दरबार आउंदे रहिये माँ,

खुले आके तेरे ही दीदार पौंदे रहिये माँ,

सनी शाह ने लाड लाया लाल चिंतपूर्णी दा,

जय माता दी सब नु भुला के भगतो,

करलो जी करलो दीदार चिंतपूर्णी दा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।