हमरी भव सागर से नैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हमरी भव सागर से नैया पार करिदे तू नाइ,

बिगड़ी जन्म जन्म के खवइयाँ,

ज्ञान बताई दे इतना,

हमरी भव सागर से नैया ...

मोह जाल में फस कर भगवन बीती जाए उमरियाँ,

आतम ज्ञान बिना सब सूना सूजे नाही डगरियाँ,

हमरी भव सागर से नैया पार करिदे तू नाइ,

झूठे रिश्ते झूठे नाते किस का कौन यहाँ है

भटक रहा है मैं दर दर प्रभु जी लेवे कौन खबारियाँ,

हमरी भव सागर से नैया पार करिदे तू नाइ,

बीच भवर में दुभत नाइयाँ अब तो आस तुम्हरी,

दीन दुखी निर्बल शरणागत किरपा करो हे मुरारी,

हमरी भव सागर से नैया पार करिदे तू नाइ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।