परदा हमसें करते हो क्यों बिहारी जी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

परदा हमसें करते हो क्यों बिहारी जी,

मुख अपना छिपाते बिहारी जी

परदा हमसें करते हो क्यों बिहारी जी

फूलों कलियों सा तेरा मुखड़ा है

चाँद तारों में एकलौता टुकड़ा है

मन ये मेरे में पर ये दुखड़ा है

रूप क्यों ना दिखाते बिहारी जी

परदा हमसे करते हो क्यूँ बिहारी जी

नैन कजरारे सैन सुखकारे

बैन हितकारे मन को पुचकारे

खींची आई मै अब तेरे द्वारे

हमसे नज़ारे मिला लो बिहारी जी

परदा हमसे करते हो क्यूँ बिहारी जी

नैन काजल है घने बादल हैं

पाँव पायल है दिल ये घायल है

बाबा रसिक भी तेरा पागल है

गोपाली का सब कुछ बिहारी जी

परदा हमसे करते हो क्यूँ बिहारी जी

मुख अपना छिपाते बिहारी जी

परदा हमसे करते हो क्यूँ बिहारी जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।