मेरे साई मैं जब चाहु मुझे मुखड़ा दिखा देना

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे साई मैं जब चाहु मुझे मुखड़ा दिखा देना ,

तुम इस दुनिया के सेहरा में बस इक वरखा दिखा देना,

मेरे साई मैं जब चाहु मुझे मुखड़ा दिखा देना ,

मैं तेरे काम की खातिर तेरे कदमो में आया हु,

अटक जाऊ जो रस्ते से मुझे वो रस्ता दिखा देना,

तुम इस दुनिया के सेहरा में बस इक वरखा दिखा देना,

मेरे साई मैं जब चाहु मुझे मुखड़ा दिखा देना ,

अगर मगरूर हो जाऊ मैं तुमसे दूर हो जाऊ,

वही मेरे गुनाहो का मुझे शीशा दिखा देना,

तुम इस दुनिया के सेहरा में बस इक वरखा दिखा देना,

मेरे साई मैं जब चाहु मुझे मुखड़ा दिखा देना ,

बिठा लेना मुझे पहले तुम अपने आसताने पर ,

फिर उस के बाद जो अब तक नहीं देखा दिखा देना ,

तुम इस दुनिया के सेहरा में बस इक वरखा दिखा देना,

मेरे साई मैं जब चाहु मुझे मुखड़ा दिखा देना ,

हर इक पग पर दिखाए है हजारो मौजझे तुमने,

मुझे जो पार कर दे वो भी इक लम्हा दिखा देना,

तुम इस दुनिया के सेहरा में बस इक वरखा दिखा देना,

मेरे साई मैं जब चाहु मुझे मुखड़ा दिखा देना ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।