चली रे चली आज देखो पालकी साई की

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॥ पावन पाठ ॥

झूमो नाचो गाओ सारे भगतो रंगो से मनाओ आज होली,

के पालकी उठाओ के साई साई गाओ,

चली रे चली आज देखो पालकी साई की,

आज देखो शिरडी जैसा हो गया नजारा,

साई साई गूंज उठा नाम प्यारा प्यारा,

श्रद्धा से मिल जाओ सारे भगतो,

घर घर सजाओ आज रोली

के पालकी उठाओ के साई साई गाओ,

चली रे चली आज देखो पालकी साई की,

ढोल भजे संख भजे भजे शेहनाई,

कष्ट सारे दूर हो जो गाये साई साई,

राजो के राज है ये भगतो हम तो है इनके सवाली,

तो आरती उतारो तो मन से इनको ध्याओ,

चली रे चली आज देखो पालकी साई की,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।