अपने श्याम कन्हैया को देखूँ बिना पलक झपकाये

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अपने श्याम कन्हैया को देखूँ बिना पलक झपकाये,

इन अँखियों की डिब्बियां के ढक्कण टूट टूट गिर जाये,

अपने श्याम कन्हैंया को देखूँ बिना पलक झपकाये,

वो शरीर ही किस काम का जो नाम ना ले श्याम का,

अपने श्याम कन्हैया को देखूँ बिना पलक झपकाये,

बार बार ढक्कण गिरते हैं कान्हा,

परेशान दिल को करते हैं कान्हा,

डर लगता है पलक झपकते श्याम चला ना जाये,

अपने श्याम कन्हैंया को देखूँ बिना पलक झपकाये,

रक्खो ये नैणा तब तक मिलाये,

बांकी छवि ना इनमें जब तक समाये,

सुणा है इन नैनों के ज़रिये दिल से दिल टकराये,

अपने श्याम कन्हैंया को देखूँ बिना पलक झपकाये,

खुले रहते हैं हरदम ढक्कण तुम्हारे,

अगर एक छण भी गिरते ढक्कण हमारे,

चाहे अखियाँ फुट जाये पर पर ऐसा दिन ना दिखाये,

अपने श्याम कन्हैंया को देखूँ बिना पलक झपकाये,

बनवारी नैणा मिलाते मिलाते अँखियों में सूरत समाते समाते,

बनवारी जो कभी गिरे ना वो ढक्कण लग जाये,

अपने श्याम कन्हैंया को देखूँ बिना पलक झपकाये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।