असि हो गये दीवाने बाबा लाल जी तेरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन बावा लाल दयाल भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हर पास वेखो नुरो नूर हो गया ख़ुशी सादे नेड़े गम दूर हो गया,

खुशिया दे नाल तू ते भर दे वेहड़े ,

असी हो गये दीवाने बाबा लाल जी तेरे,

जन्म दिहाड़े तेरे भगत मना रहे मीठे मीठे बाबा जी भजन तेरे गा रहे,

साडे दिल विच सैयां तू ते लाये ने डेरे,

असी हो गये दीवाने बाबा लाल जी तेरे,

पिता भोला मल माता कृष्णा दा लाल जी,

कसूर विच जन्मे से बाबा लाल दयाल सी,

रति अवतार बन पाए ने तेरे,

असी हो गये दीवाने बाबा लाल जी तेरे,

राम सूंदर दास जी न देयो रल वधाईयां जी,

जीना छिपे दे भगता ते महरा वासियां जी,

कार्तिक भी नच नच दर दे तेरे,

असि हो गये दीवाने बाबा लाल जी तेरे,

राइये राइये राइये जन्म दिन लाल जी दा असी श्रद्धा दे नाल मनाइये ,

टाइया टाइया टाइया जन्म दिहाड़े दिया सारी संगत नु हों वधाईया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।