शिवजी की जटा में छुप जाने वाले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिवजी की जटा में छुप जाने वाले,

नाग देवता त्राहि माम त्राहि माम

अरे शंकर के गले को सजाने वाले

विष्णु को सैया पे सुलाने वाले

शंकर के जटा मे छुप जाने वाले

नाग देवता त्राहि माम त्राहि माम

जो शिव शंकर पा गया वो सब पा गया,

शिवजी की जटा में छुप जाने वाले

नाग देवता त्राहि माम त्राहि माम

अरे कोमल कोमल अंग तिहारा हा आ

कोमल कोमल अंग तिहारा

श्याम वरण तेरा लागे प्यारा

अरे झिलमिल झिलमिल जान तिहारी हा आ

झिलमिल झिलमिल चाल तिहारी

अरे जैसे जमुना जल की धारा

अरे शेष हजार फनो वाले

ओ भगता की लाज बचाने वाले

ओ नाग देवता त्राहि माम त्राहि माम

नाग देवता त्राहि माम त्राहि माम

अरे सोवे बालक रोवे माता हा आ

सोवे बालक रोवे माता

ये कैसा अन्याय विधाता

ये बालक है तुम पालक हो हा आ

ये बालक है तुम पालक हो

प्राण दान दो जीवन दाता

शेष हजार फनो वाले

भगतो की लाज बचाने वाले

अरे शंकर के गले को सजाने वाले

विष्णु को सैया पे सुलाने वाले

नाग देवता त्राहि माम त्राहि माम

शिवजी की जटा में छुप जाने वाले

अरे शंकर के गले को सजाने वाले

विष्णु को सैया पे सुलाने वाले

शंकर के जटा मे छुप जाने वाले

नाग देवता त्राहि माम त्राहि माम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।