जो मेरे श्याम की नगरी आओगे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जो मेरे श्याम की नगरी आओगे,

नहीं पछताओगे नहीं पछताओगे,

खाटू वाली गलियां न भूल पाउगये,

करो गे जी याद इसे पास पाओगे,

बाबा श्याम से प्रेम बढ़ाओ गे,

नहीं पछताओगे नहीं पछताओगे,

खाटू की कण कण में श्याम मिलेगा,

श्याम प्रेमी सा परिवार मिलेगा,

प्रेम मिले ऐसा यहाँ कहा पाओगे,

सँवारे सा सेठ ढूंढ नहीं पाओगे,

जग में धूम के नहीं कोई पाओगे,

नहीं पछताओगे नहीं पछताओगे,

श्याम से नज़रे मिलने लगोगे,

खाटू जी की गलियों में आने लगोगे,

सकूं मिलेगा आराम मिलेगा श्याम मिलेगा आठो याम मिलेगा,

करने जो और काम बुलजाओगे,

श्याम की सूरत में खो जाओगे,

श्याम मनाओगे श्याम रेजाओ गे,

नहीं पछताओगे नहीं पछताओगे,

सँवारे की प्रीत में जो बांध जाओ गे,

श्याम श्याम नाम हर रोज गाओ गे,

मन में ख़ुशी मिले तुम्हे जब भी आओ गे,

तुलसी शरण श्याम की न भूल पाओगे,

मौज मनाओ गे प्यार वो पाओगे,

नहीं पछताओगे नहीं पछताओगे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।