आना आ जाना माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आना आ जाना माँ

जब जब याद करें, हमें दर्श दिखाना माँ

जय जय माँ शेरांवाली माँ

तेरा दर है सुहाना माँ

तेरा दर है सुहाना माँ

बस एक विनती है यहीं देदो ठिकाना माँ

जय जय माँ, शेरावाली माँ

हमें ना ठुकराना माँ

हमें ना ठुकराना माँ

माँ और बेटे का नाता है पुराना माँ

जय जय माँ, शेरांवाली माँ

हमें भूल ना जाना माँ

हमें भूल ना जाना माँ

भेज के संदेसे हर साल बुलाना माँ

जय जय माँ, शेरांवाली माँ

ये मेरी अर्जी है, मैं वो बन जाऊं जो तेरी मर्जी है

भजन गायक

(मनीष अनेजा जी)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।