सुन दुखयारी दिल दी दुआ सतगुरु साईं देवा

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॥ पावन पाठ ॥

सुन दुखयारी दिल दी दुआ सतगुरु साईं देवा,

कर मेहर दी कर किरपा सतगुरु साईं देवा,

सुन दुखयारी दिल दी दुआ सतगुरु साईं देवा,

दुनिया जहान सारा तक तक हारेया,

किती न कदर साड़ी मित्रा प्यारेया,

झूठे मुहो भी न दुख पूछेया सतगुरु साईं देवा,

सुन दुखयारी दिल दी दुआ सतगुरु साईं देवा,

दुखियां निमानेया दा किधरे भी कोई न,

दुजेया दे दुखा विचा अख कोई रोई न,

सब तक दे ने सुख अपना,सतगुरु साईं देवा,

सुन दुखयारी दिल दी दुआ सतगुरु साईं देवा,

जिह्ना लई घुट आसा जेहरा वाली पीती नही,

खुद ते जुलम आसा जिह्ना लई किती नही,

ओहियो कर दे ने हूँ शिकवा सतगुरु साईं देवा,

सुन दुखयारी दिल दी दुआ सतगुरु साईं देवा,

असी कमजोर बली बलियां दा बलि तू,

साहिल ते भी कर नजर सवली तू,

हूँ भूल चुक साडी भूल जा सतगुरु साईं देवा,

सुन दुखयारी दिल दी दुआ सतगुरु साईं देवा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।