सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची

नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची

सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची

कंठी झळके माळ मुक्ताफळाची

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती

दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ती

जयदेव जयदेव

रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा

चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा

हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा

रुणझुणती नुपुरे चरणी घागरिया

जयदेव जयदेव जयमंगल मूर्ती

दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ती

जयदेव जयदेव

लंबोदर पितांबर फणिवर बंधना

सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना

दास रामाचा वाट पाहे सदना

संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना

जयदेव जयदेव

जयदेव जयदेव जयमंगल मूर्ती

दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ती

जयदेव जयदेव

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।