खींच के कर उघाड़ी साडी कर रहे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

द्रोपदी पुकारी भाइयाँ आजा मुरारी रोते रोते,

खींच के कर उघाड़ी साडी कर रहे,

देर कन्हियाँ होते होते,

आजा मोहन आजा मोहन आजा मोहन,

वाह रे विद्याता कौन से दिन ये आज मुझे दिखलाये,

पांचो पति में बल धारी खड़े है नार झुकाये,

कुछ समज ना आई लाज तुहि अब बचाये,

मैं हु शरण में तेरी लाज तेरी ही जाए,

करती दुहाई कान्हा असुवन से मुँह धोते धोते,

खींच के कर उघाड़ी साडी कर रहे,

पुत्र मोह में ससुर हमारे आँखों पे पर्दा चढ़ाये,

भाभी माँ की दाखिल होती कौन इन्हे समजाये,

कौन अपना पराया अपनों ने ही फसाया ,

आज रिश्ते हुए बेघर खेल ऐसा है रचाया,

जाग जा मुरारी केशव रे तू न जाना सोते सोते,

खींच के कर उघाड़ी साडी कर रहे,

दोनों हाथ उठा कर बोली सुन ले बंसी वाले,

तन मन की अब नैया मैंने कर दी तेरे हवाले,

मेरी सुन ले मुरली वाले दुनिया देगी अब मिसाले,

लाज मेरी लूट रही है लाज आके तू बचा ले,

प्रगटे मुरारी लाज जाने न दूंगा खोते खोते,

खींच के कर उघाड़ी साडी कर रहे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।