नैया मंझधार में कोई न सहाई है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नैया मंझधार में कोई न सहाई है

आके सम्भालो श्याम अब ना समाई है

अपनों से धोखों का ही मिला उपहार है

अब तो पराये हुए सारे रिश्तेदार हैं

अँधियारा घोर कुछ भी देता ना दिखाई है

आके सम्भालो श्याम अब ना समाई है

नैया मंझधार में ..........

देखूं जिधर भी अब तो आफत ही आफत है

तेरे सिवा ना कोई करे जो हिफाज़त है

उम्मीदें सारी मैंने तुमसे लगाई हैं

आके सम्भालो श्याम अब ना समाई है

नैया मंझधार में ..........

देव दयालु मेरी लाज बचाओ ना

बांके खिवैय्या बेडा पार लगाओ ना

मोहित ने तुमसे मोहन अर्ज़ी लगाई है

आके सम्भालो श्याम अब ना समाई है

नैया मंझधार में ..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।