तू है कमाल साई

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॥ पावन पाठ ॥

तू है कमाल साई तू है विशाल तेरी महिमा कमाल.

तू चाहे सब देदे तू चाहे सब लेले रहमत तेरी बेमिसाल,

तू है कमाल साई.....

तेरी जमीन ये तेरा गगन है तेरी ठंडी हवाए,

तेरी नदियाँ तेरा गुलशन तू ही फूल खिलाये,

किस को करे निहाल हां मालामाल कोई भी जाने न,

सतगुरु साईं नाथ तेरे ये भेद कोई पहचाने न,

तू है कमाल साई

तेरे नज़ारे चाँद सितारे श्रृष्टि के सुख सारे,

वन उपवन पशु पक्षी सारे है अधीन तुम्हारे,

तू सब का करतार है पान्हार है जाने सारा जहां,

सब का कष्ट हरे तू झोली भरे नही कुछ तेरे बिना,

तू है कमाल साई

इश्वर का वरदान तुम्ही हो कृष्ण तुम्ही हो राम,

चाहे जिस भी रूप में देखू तुम ही तुम साईं राम,

उची तुम्हारी शान है साईं महान कोई ये जाने न ,

हम पे भी देदो ध्यान मेरे भगवान जरा मेरी बिगड़ी बना,

तू है कमाल साई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।