साधो भाई या मन की बदमाशी

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॥ पावन पाठ ॥

साधो भाई या मन कि बदमाशी,

अपनी इज्जत ने धूल में मिलावे ,गणी करावे हांसी,

यो मन तो भाई तीर्थ करावे ,ले जावे मथुरा काशी,

यो ही मन जेल में बिठावे, गले लगावे फांसी,

यो मन तो पूजा करावे ,गले फूल पहरासी,

यो ही मन जूता मेलावे ,धौला में धूलो नकासी,

यो मन तो भाई हाथी पर बिठावे, गणा चंवर ढुलासी,

यो ही मन गधा पर बिठावे ,मुंडो कालो करासी,

यो मन बस कोई बिरला किदो,वाको नाम अमर रह जासी,

मन जो भान्दू घूम गयो तो ,लख चौरासी में जासी,

गोकुल स्वामी सतगुरु देवा ,भीण भीण कर समझासी,

लादूदास कहे दुःख नरक को, सहज सहियो नही जासी,

भजन गायक चम्पा लाल प्रजापति मालासेरी डूँगरी

89479-15979

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।