दीना रा दयाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दीना रा दयाल प्रभु जी ,म्हाने थांको आसरो,

मीरा बाई ध्यान कियो ,भक्ति रस पान कियो

पा गई परम पद ,ध्यायो पीहर सासरो,

करमा बाई जाटणी, पालो पानी काटणी,

प्रेम सूं जिमायो थाने ,कूट गाल्यो बाजरो,

नर्सिलो कंगाल भयो ,धन ने लुटाय दीयो,

भक्त को बढ़ायो मान ,भात भरियो साँतरो,

सुणो जी बिहारी लाल ,मांगू नही धन माल,

भक्ति को वरदान मांगू ,हेलो सुण लो दास रो,

भवर है चरण चेरा ,ध्यान घनश्याम तेरा,

ह्रदय में लगाओ डेरा ,राखो मत ना आंतरो,

गायक चम्पा लाल प्रजापति मालासेरी डूँगरी

89479-15979

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।