ओ सँवारे तुझपर तन मन ये वारा है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ओ सँवारे तुझपर तन मन ये वारा है,

पल भर में तूने मेरा जीवन सवारा है,

तेरे ही तो दम पर बाबा मेरी जिंदगानी,

जीवन की सारी बाते नहीं तुझसे जानी,

जमी से उठा कर मुझको फलक पर बिठाया है,

ओ सँवारे तुझपर तन मन ये वारा है,

भटक ता रहा मैं दर दर मिला न किनारा,

हारुँगा कैसा संग है हारे का सहारा,

तुम ने माझी बन नैया को किनारे लगाया है ,

ओ सँवारे तुझपर तन मन ये वारा है,

तुजसे बना है मेरा जीवन सुहाना,

बिन तेरे चरणों के अब नहीं ठिकाना,

कही और जाऊ कैसे तू ही मेरा प्यारा है,

ओ सँवारे तुझपर तन मन ये वारा है,

पंकज को श्याम जैसी यारी न मिलेगी,

बिन तेरे ओ बाबा दिल की क्यारी न खिले गी,

डूभ मैं रहा था मुझको तूने ही उबारा है

ओ सँवारे तुझपर तन मन ये वारा है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।