गुरू जम्भेश्वर की आरती कीजे

-स्वामी सदानन्द जोधपुर
माता दुर्गा आरती विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

गुरू जम्भेश्वर की आरती कीजे।

रूप अलोकिक सब निरखीजे।।

समराथल पर आप विराजे।

गल मोतियन की माला साजे।।

भंगवी टोपी रूप निराला।

माता हंसा लोहट जी के लाला।।

आदी विष्णु जी के हो अवतारी।

लीला अद्भुत है प्रभु थारी।।

सदानन्द पर किरपा कीजो।

मानव जनम सफल कर दीजो।।

रचनाकार:-स्वामी सदानन्द जोधपुर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।