जो न करे लकीर हाथ की

सर्व मोहन (टीनू सिंह)
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॥ पावन पाठ ॥

जो न करे लकीर हाथ की सोइ करे फ़कीर,

इन फकीरो की मौज बदल दे बन्दे की तकदीर,

जो न करे लकीर हाथ की सोइ करे फ़कीर,

जो ज्योतिष विज्ञान करे न वैद भी जिस की हामी भरे न,

वो सब कर दे नजरे फ़कीर

इन फकीरो की मौज बदल दे बन्दे की तकदीर,

जो न करे लकीर हाथ की सोइ करे फ़कीर,

इन फकीरो की खेल निराले,

समज सके न इनको दुनिया वाले,

आँखों में वसी है इनके खुदाई तस्वीर,

इन फकीरो की मौज बदल दे बन्दे की तकदीर,

जो न करे लकीर हाथ की सोइ करे फ़कीर,

जग से जुदा ही इनका विचार है,

रब ही है बंदगी रब ही यार है,

बाँध सके न इनको जंजीर,

इन फकीरो की मौज बदल दे बन्दे की तकदीर,

जो न करे लकीर हाथ की सोइ करे फ़कीर,

परख इनकी कभी न कीजिये,

मधुप फकीरो का कहा मान लीजिये,

महफ़िल फकीरो की बेनजी

इन फकीरो की मौज बदल दे बन्दे की तकदीर,

जो न करे लकीर हाथ की सोइ करे फ़कीर,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।