मिले न जो इस दुनिया के मायावी बाजार

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॥ पावन पाठ ॥

मिले न जो इस दुनिया के मायावी बाजार में,

वो सब मिलता है साई देवा के दरबार में

याहा दुआ की सदा खुली दूकान,

बन के सेठ बैठे है साई किरपा निधान,

नित दे रहे है सब को बिन मोल यहाँ बंदो,

जितनी चाहे लेलो बिन तोल याहा बंदो,

धन भाव नहीं मन भाव करते साई इस व्यपार में,

वो सब मिलता है साई देवा के दरबार में,

मिले न जो इस दुनिया के मायावी बाजार में,

भगति याहा मिलती मुक्ति यहाँ भगतो,

शक्ति यहाँ मिलती युक्ति यहाँ मिलती,

दया किरपा की तो धार सदा बहती,

सुख समृदि साई के चरणो मे रहती,

सुख का सूरज चमके है ऐसे दुःख के अन्धकार में,

वो सब मिलता है साई देवा के दरबार में,

मिले न जो इस दुनिया के मायावी बाजार में,

हर व्यागि की मिलती यहाँ दवा हर दम,

खुशिया मिले मन को हो दूर सभी गम,

झोली सतगुरु की दिन रात यहाँ जलती,

है भभूति जिस की हर विपदा को हरती,

कमी नहीं कुछ भी साई दाता के भण्डार में,

वो सब मिलता है साई देवा के दरबार में,

मिले न जो इस दुनिया के मायावी बाजार में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।