श्याम से श्यामा बोली चलो खेलेंगे होली

अलका गोएल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम से श्यामा बोली चलो खेलेंगे होली

बाग़ है यह अलबेला, लगा कुंजो में मेला,

हर कोई नाचे गाये, रहे कोई ना अकेला ।

झूम कर हर कोई बोलो हर बरस आये यह होली ॥

चलो खेलेंगे होली...

कभी वृन्दावन खेले, कभी बरसाने खेले,

कभी गोकुल में खेले, कभी बरसाने खेले ।

रंगी नंदगाव की गालीयाँ, रंगी भानु की हवेली ॥

चलो खेलेंगे होली...

ग्वाल तुम संग में लाना, मेरे संग सखीयाँ होंगी,

उन्हें तुम रंग लगाना, चाह वो करती होंगी ।

तुम्हे मैं दूंगी गाली, काहे खेलत हो होरी ॥

चलो खेलेंगे होली...

कभी गुलाल उडाए, कभी मारे पिचकारी,

कभी रंग जाए राधा, कभी रंग जाए बिहारी ।

है कैसा मस्त महिना, है कैसी सुन्दर जोड़ी ॥

चलो खेलेंगे होली...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।